| गिरिशिखरम् |
गिरे: शिखरम् । |
| राजप्रसाद: |
राज्ञ: प्रसाद: । |
| वृक्षपर्णानि |
वृक्षस्य पर्णानि । |
| अर्थार्थी |
अर्थस्य अर्थी । |
| जीवलोक: |
जीवानाम् लोक: । |
| दुर्जनसंसर्ग: |
दुर्जनस्य संसर्ग: । |
| मानहानि: |
मानस्य हानि: । |
| लोहसंसर्ग: |
लोहस्य संसर्ग: । |
| राजसभाम् |
राज्ञ: सभा ताम् । |
| पारितोषिकाशया |
पारितोषिकस्य आशा तया । |
| रक्षणोपाय: |
रक्षणस्य उपाय: । |
| बुद्धिचातुर्येण |
बुद्धे: चातुर्यम् तेन । |
| मिष्टान्नभक्षणम् |
मिष्टान्नस्य भक्षणम् । |
| वार्षिकश्राद्धावसरे |
वार्षिकश्राद्धस्य अवसर: तस्मिन् । |
| पुस्तिकापठनम् |
पुस्तिकाया: पठनम् । |
| शङ्कालेश: |
शङ्काया: लेश: । |
| स्वालस्यस्य |
स्वस्य आलस्यम् तस्य । |
| मृगेंद्रम् |
मृगाणाम् इन्द्र: । |
| ऋषिकुमारस्य |
ऋषे: कुमार: तस्य । |
| हस्तग्रह: |
हस्तस्य ग्रह: । |
| महर्षिपुत्र: |
महर्षे: पुत्र: । |
| परदारा: |
परेषां दारा । |
| दृष्टिक्षेप: |
दृष्टे: क्षेप: । |
| नामसादृश्येन |
नाम्न: सादृश्यम् तेन । |
| सिंहशावक: |
सिहस्य शावक: । |
| चंद्रार्ध: |
चन्द्रस्य अर्ध: । |
| चंद्रांशव: |
चन्द्रस्य अंशव: । |
| कर्णविवरम् |
कर्णस्य विवर: तम् । |
| करुणामूर्ति: |
करुणाया: मूर्ति: । |
| िख्र्तासब्दे: |
िख्र्तास्स्य अब्द: तस्मिन् । |
| पितृवियोग: |
पितु: वियोग: । |
| सेवाकार्यम् |
सेवाया: कार्यम् । |
| विद्यालये |
विद्याया: आलय: तस्मिन् । |
| अध्यापनव्रतम् |
अध्यापनस्य व्रतम् । |
| जीवनसाध्यम् |
जीवनस्य साध्यम् । |
| अध्यापिकापदम् |
अध्यापिकाया: पदम् । |
| रुग्णसेवा |
रुग्णानाम् सेवा । |
| ईश्वरसेवा |
ईश्वरस्य सेवा । |
| भारतशासनेन |
भारतस्य शासनम् तेन । |
| भारतरत्नम् |
भारतस्य रत्नम् तेन । |
| दीनमाता |
दीनानाम् माता । |
| व्यसनकाल: |
व्यसनस्य काल: । |
| गुरुगृहम् |
गुरो: गृहम् । |
| ईश्वरचिंतने |
ईश्वरस्य चिन्तनम् तस्मिन् । |
| तटिनीतटम् |
तटिन्या: तटम् । |
| रघुनाथ: |
रघूणाम् नाथ: । |
| सूर्यप्रकाश: |
सूर्यस्य प्रकाश: । |
| श्रुतिपथम् |
श्रुते: पथम् । |
| दु:खकारकाम् |
दु:खस्य कारकाम् । |
| कार्योत्पत्ति: |
कार्यस्य उत्पत्ति: । |
| परार्थ: |
परस्य अथ: । |
| स्वार्थ: |
स्वस्य अर्थ: । |
| मेघकंठे |
मेघस्य कण्ठे । |
| जगन्मूलम् |
जगत: मूलम् । |
| संपत्तिविभाजनम् |
सम्पत्ते: विभाजनम् । |
| कलशचतुष्टयम् |
कलशानाम् चतुष्टयम् । |
| कुंभकारगृहम् |
कुम्भकारस्य गृहम् । |
| राजकार्ये |
राज्ञ: कार्यम् तस्मिन् । |
| शककर्ता |
शकस्य कर्ता । |
| भवच्छिष्यान् |
भवताम् शिष्या: तान् । |
| छिद्रान्वेषिण: |
छिद्रस्य अन्वेषिण: । |
| हितैषिण: |
हितस्य एषिण: । |
| स्वानत:करणम् |
स्वस्य अन्त:करणम् । |
| सुवर्णगुणातिरेकेण |
सुवर्णस् गुण: । सुवर्णगुणस्य अतिरेक: तेन । |
| स्वेदबिंदुभि: |
स्वेदस्य बिन्दव: तै: । |
| अरण्यमध्ये |
अरण्यस्य मध्यम् तस्मिन् । |
| वृक्षतले |
वृक्षस्य तलम् तस्मिन् । |
| पदरव: |
पदानाम् रव: । |
| सेनापति: |
सेनाया: पति: । |
| नृपति: |
नृणाम् पति: । |
| अधिकारपदानि |
अधिकारस्य पदानि । |
| शब्दविशेषै: |
शब्दानाम् विशेष: तै: । |
| स्वनगरम् |
स्वस्य नगरम् । |
| निद्रागमे |
निद्राया: आगम: तस्मिन् । |
| विश्वमूर्ति: |
विश्वस्य मूर्ति: । |
| जगन्नाथ: |
जगत: नाथ: । |
| ग्रहणशक्ति: |
ग्रहणस्य शक्ति: । |
| कल्पनाशक्ति: |
कल्पनाया: शक्ति: । |
| पाणिनीविषये |
पाणिने: विषय: तस्मिन् । |
| भूप्रदेश: |
भुव: प्रदेश: । |
| नयनानन्द: |
नयनयो: आनन्द: । |
| ज्ञानतृष्णा |
ज्ञानस्य तृष्णा । |
| स्वदेशम् |
स्वस्य देश: तम् । |
| पूजास्थानम् |
पूजाया: स्थानम् । |
| मानुषशक्ति: |
मेनुषस्य शक्ति: । |
| कुलक्रम: |
कुलस्य क्रम: । |
| दिग्विजय: |
दिशाम् विजय: । |
| कुलविनाशकम् |
कुलस्य विनाशकम् । |
| मङ्गलायनम् |
मङ्गलस्य अयनम् । |
| सुरापानम् |
सुराया: पानम् । |
| मद्यपानम् |
मद्यस्य पानम् । |
| कुलक्षय: |
कुलस्य क्षय: । |
| द्रविणाशया |
द्रविणस्य आशया । |
| सभाद्वारम् |
सभाया: द्वारम् । |
| धूलिपीडा |
धूले: पीडा । |
| रहस्यभेद: |
रहस्यस्य भेद: । |
| सारस्वतजन्मभू: |
जन्मन: भू: । सारस्वतानाम् जन्मभू: । |
| कृषकपरिवार: |
कृषकस्य परिवार: । |
| देवालये |
देवस्य आलय: तस्मिन् । |
| शास्त्रचर्चा |
शास्त्राणाम् चर्चा । |
| शास्त्रज्ञाम् |
शास्त्राणाम् ज्ञानम् । |
| कुशाग्रम् |
कुशस्य अग्रम् । |
| भक्तिविषये |
भक्ते: विषय: तस्मिन् । |
| संस्कृतवाङ्मये |
संस्कृस्य वाङ्मयम् तसिमन् । |
| यमालयम् |
यमस्य आलयम् । |