जयन्ति ते
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जयन्ति ते सुकृतिनः रससिद्धाः कवीश्वराः । |
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ज्यांचें असे पुण्य कीं सावकाश विशेषें जनीं शोभती ते कवीस ॥ |
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जयन्ति ते सुकृतिनः रससिद्धाः कवीश्वराः । |
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ज्यांचें असे पुण्य कीं सावकाश विशेषें जनीं शोभती ते कवीस ॥ |