दाक्षिण्यं स्वजने
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दाक्षिण्यं स्वजने दया परिजने शाठ्यं सदा दुर्जने |
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आप्तांची बहु भीड सेवकजनीं कारुण्य विद्वज्जनीं- |
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दाक्षिण्यं स्वजने दया परिजने शाठ्यं सदा दुर्जने |
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आप्तांची बहु भीड सेवकजनीं कारुण्य विद्वज्जनीं- |